यहां क्या कोई हारता है
सब समय के साथ चलता है
कोई हार कर भी जीत जाता है
तो कोई जीत कर भी हार जाता है
जिसका समय बुरा चल रहा है,
वो अशा हो कर भी बुरा बन जाता
है
और जिसका समय अशा चल रहा है,
वो बुरा हो कर भी अशा बन जाता
है
ए सारा समय का खेल है
हम सब समय के खेल के प्यादे है
अशा खेलने वाले भी खेल से बाहर
हो जाते है
कभी नहीं खेलने वाले भी जीत
जाते है
यहां तो समय ही बलवान है
हम कितने भी बलवान क्यूं ना हो
फिर भी समय के सामने हार ही
जाते है
कोई समय का "महिमा" गा कर आगे निकल जाते है
तो कोई समय के ववंडर में फस कर
मर जाते है
- संगीअखिल "अखो"
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