हम तो वतन से प्रीति रखते है
वतन के आगे प्रेम भी कुरबान करते है ... ......
..... (1)
वतन सर मागे तो सजा कर देगे
अगर कोइ वतन मागे तो सर काट देगे ..... ..... ....(2)
जन्म से प्रेम कर सुके है वतन से
अब वतन के अलावा किसी से प्रेम हो नहि सकता ... ....(3)
भगत,गुरु,देव को मेरा कौटी-कौटी सलाम
वतन के वास्ते फासी पर सड गये साथमें .... .... (4)
वतन के रंगे रंगाया हुं मेरे यार
ओर रंग से रंगने कि बेकार में कोसिस ना कर ..... ...(5)
नशा तो हमने वतन के प्रीत का लिया है
एक बार लिया है मरने तक नहि उतरेगा ..... ..... (6)
शहिदो का "महिमा" लिख कर खुद शहिद हो जाउगा
वतन के वास्ते शहिदो में एक मेरा नाम लग जाएगा .. .. (7)
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संगीअखिल "अखो"
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